नासरी के सिवा मैं तो कुछ

नासरी के सिवा मैं तो कुछ भी नहीं.....
होके उससे जुदा मैं तो कुछ भी नहीं

उसकी राहों पे चलता रहूं उमर भर
चुकंदर जाए यूही जिंदगी का सफारी
फजल कर ऐ खुदा मैं तो कुछ भी नहीं
होके उससे जुदा मैं तो कुछ भी नहीं

कतरा कतरा लहू तेरा बहता रहा:
हर ज़ुल्म तू हस्के सेहता रहा
मेरी शिफा के लिए वो था कुचला गया


नासरी के सिवा मैं तो कुछ भी नहीं.....

माफ़ करता हमारी हर एक वो खाता
देता न वो हमारे गुनाह की सजा
है ये उसकी दया मैं तो कुछ भी नहीं


नासरी के सिवा मैं तो कुछ भी नहीं.....

खाक हूं खाक मैं लौटना है मुझे
ये बदन का वतन चोदना है मुझे
वो ठिकाना मेरा मैं तो कुछ भी नहीं


नासरी के सिवा मैं तो कुछ भी नहीं.....

उसका रास्ता बड़ा छेद से तंग  है
हर कदम पर मगर वो मेरे संग है
वो मेरा रहनुमा मैं तो कुछ भी नहीं


नासरी के सिवा मैं तो कुछ भी नहीं.....
होके उससे जुदा मैं तो कुछ भी नहीं

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