तू ही तो आधार है मेरे जीने का,
तू ही तो आधार है मेरे जीने का,
तू ही तो सहारा है मेरे राहों का – 2
मैं न तो आंधी से, न डरूँगा कोई गम से – 2
तू ही तो आधार है मेरे जीने का,
तू ही तो सहारा है मेरे राहों का – 2
1. हाथ पकड़कर चलाता मुझे, हरी चराइयों में,
कोई घाटी न होने देता, देता वो भरपुरी से – 2
मैं न तो आंधी से, न डरूँगा कोई गम से
तू ही तो आधार है मेरे जीने का,
तू ही तो सहारा है मेरे राहों का
(2)
आए जो मुश्किल मेरी राहों पर, टालेगा यीशु उन्हे,
हर मोड पर वो संभाले रहेगा, अपने ही पंखों तले – 2
मुझको न कोई गम, न शिकवा गिला होगा
मैं न तो आंधी से, न डरूँगा कोई गम से
तू ही तो आधार है मेरे जीने का,
तू ही तो सहारा है मेरे राहों का
(3)
होकर चलूँ गर मैं अंधकार से, भरी तराइयों में,
तो भी हानी से न मैं डरूँगा, रहेगा संग वो मेरे – 2
मुझ संग है यीशु जो, तो मैं हानी से क्यों डरूँगा
मैं न तो आंधी से, न डरूँगा कोई गम से
तू ही तो आधार है मेरे जीने का,
तू ही तो सहारा है मेरे राहों का – 2
मुझको सुखदाई जल, के निकट है वो ले चलता
मैं न तो आंधी से, न डरूँगा कोई गम से – 2
तू ही तो आधार है मेरे जीने का,
तू ही तो सहारा है मेरे राहों का – 2
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