करले कब्जा ऐ पाक रूह (4) // Karle Kabja Ai Paak Ruh
सोचो पे कब्जा खयालों पे कब्जा
सांसों पे कब्जा बातों पे कब्जा
करले कब्जा ऐ पाक रूह (4)
मालिक तू ही हरदम का है
मालिक तू ही हरदम का है
मरहम तू ही हर गम का है
मरहम तू ही हर गम का है
हर दम पे कब्जा हर ग़म पे कब्जा
हर दम पे कब्जा हर ग़म पे कब्जा
करले कब्जा ऐ पाक रूह (4)
राहे तुझ से जुड़ती रहे अब
राहे तुझ से जुड़ती रहे अब
हिम्मत तुझ से मिलती रहे अब 2
राहों पे कब्जा हिकमत पे कब्जा 2
करले कब्जा ऐ पाक रूह (4)
जब भी अपना मुंह में खोलू
जो भी बोलूं तेरी रूह से बोलूं 2
मेरे मुंह पे कब्जा मेरी रूह कब्जा
करले कब्जा ऐ पाक रूह (4)
तुझ में ही हर काम करूं मैं 2
जीवन तेरे नाम करूं मैं 2
काम पे कब्जा नाम पे कब्जा 2
करले कब्जा ऐ पाक रूह (4)
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