तोरे सिवा जाऊँ कहाँ,
तोरे सिवा जाऊँ कहाँ,
पाऊँ तझु जाऊँ जहाँ –(4)
1.
प्रभु मैं था एक अज्ञानी
अनग्रुह से ही तरी महिमा जानी - (2)
भेड़ हूँ मैं तू है गड़रिया
आत्मा से मझु को चरा तोरे सिवा...........
2.
काले समदंर से मैं घिरा था
आस ना थी कोई डूब रहा था – (2)
आके यीशू तूने बचाया
जीवन का मार्ग दिखाया
तोरे सिवा........
3.
प्रभु मैं था एक अभिमानी
करता था अपनी मनमानी - (2)
पत्थर सा दिल पिघलाया
सच्चा प्रेम करना सिखाया
तोरे सिवा.........
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